महु ब्रिटिश राज के दौरान दक्षिणी कमान का पाँचवा डिवीजन हुआ करता था। ब्रिटिश राज के दौरान महु एक मीटर गेज रेलवे जिला मुख्यालय था. आसपास के जंगलों में महुआ पेड़ प्रचुरता से पाए जाने के कारण इस स्टेशन के नाम की महु के तौर पर व्युत्पति हुई, महु महान सुन्दरता के लिए प्रसिद्ध है। महु का बाहरी हिस्सा प्राकृतिक सौंदर्य के दृष्टिकोण से काफी प्रचलित हैं निकट मे पाताल पानी, मेहन्दीकुण्ड, सीतलामाता झरने इसे और मनमोहक बनाते हैं, महु बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर की भी जन्मभूमि है जिन्होंने भारत के संविधान की रचना में अपना अमुल्य योगदान दिया था। महु कई ख्यातीप्राप्त खिलाड़ियों की जन्म भूमि अथवा कर्मभूमि रहा है। आर्मी वार काॅलेज, इन्फैंट्री स्कूल, एम.सी‐टीे.ई. भारतीय सेना के तीन प्रमुख संस्थान हैं. इन संस्थानों की विशेषताओं के कारण यह आर्मी केडट्स एवं आॅफिसर के प्रशिक्षण हेतु स्थापित किए गए हैं। इन्फैंट्री स्कूलः इन्फैंट्री स्कूल भारतीय इन्फैंट्रीे का अल्मा मेटर है. यह भारतीय सेना की विभिन्न रेजीमेंटों के अधिकारियों के लिए पैदल सेना से संबंधित पाठ्यक्रमों का आयोजन करता है. इस स्कूल की कमांडों विंग बेलगाम, कर्नाटक में है. भारत के लिए निशानेबाजी में कई पदक® का उत्पादन किया गया जो सेना माक्र्समैनशिप यूनिट (ए.एम.यू.) इन्फैंट्री स्कूल महु का एक हिस्सा है | एम.सी‐टी.ई. : यह सिग्नल कोर की अल्मा मेटर है. यह संचार के लिए जिम्मेदार है भारतीय एम.सी‐टीे.ई. 1967 तक सिग्नल के स्कूल के रूप में जाना जाता था. यह अधिकारियों, भारतीय सेना के जेसीओ, एन. सी. ओ और सैनिकों के लिए दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रम आयोजित करता है. एम.सी‐टीे.ई. इंजीनियरिंग में स्नातक डिग्री के लिए कैडेटों को प्रशिक्षण देता है. इन कैडेटों को उनके प्रशिक्षण के पूरा होने पर सिग्नल की भारतीय सेना के कोर में कमीशन मिलता है. वे भारतीय सेना के ’ सूचना वाॅरियर्स ’ के रूप में जाना जाता है। आर्मी वार काॅलेजः- आर्मी वार काॅलेज 2003 तक लड़ाकू काॅलेज के रूप में जाना जाता था. आर्मी वार काॅलेज में तीन कार्स जूनियर कमान (जेसी) पाठ्यक्रम, वरिष्ठ कमान ; एससी पाठ्यक्रम और उच्च कमान (एचसी) पाठ्यक्रम संचालित करता है. सेना के पूर्व चीफ (सीओएएस) जनरल लालकृष्ण सुंदरजी अस्सी के दशक के दौरान ए.डब्ल्यू.सी कमांडेंट थे |