छावनी बोर्ड-

प्रत्येक छावनी के लिए एक छावनी बोर्ड होगा।

प्रत्येक बोर्ड, संविधान के अनुच्छेद 243त के खण्ड (ड.) के अधीन, निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए, नगरपालिका समझा जाएगा,-

( क ) अनुदान और आबंटन प्राप्त करना; या

( ख) केन्द्रीय सरकार की समाज कल्याण, लोक व्यवस्था, स्वच्छता, सुरक्षा, जल प्रदाय, सफाई, षहरी नवीकरण और षिक्षा की स्कीमों को लागू करना।

छावनी बोर्ड के निगमन-

प्रत्येक बोर्ड, उस स्थान के नाम से, जिसके प्रति निदेष से वह छावनी ज्ञात है, निगमित निकाय होगा जिसका शाष्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा होगी और जिसे जंगम और स्थावर दोनों प्रकार की सम्पत्ति अर्जित करने और धारण करने की तथा संविदा करने शक्ति होगी तथा उक्त नाम से वह वाद लाएगा और उस पर वाद लाया जाएगा।

छावनी बोर्डों का गठन

छावनियाँ चार प्रवर्गों में विभाजित की जाएंगी, अर्थात्ः-

(1) प्रवर्ग 1 छावनियाँ, जिनमें जनसंख्या पचास हजार से अधिक है;

(2) प्रवर्ग 2 छावनियाँ, जिनमें जनसंख्या दस हजार से अधिक है, किन्तु पचास हजार से अधिक नहीं है;

(3) प्रवर्ग 3 छावनियाँ, जिनमें जनसंख्या दो हजार पाँच सौ से अधिक है, किन्तु दस हजार से अधिक नहीं है; तथा

(4) प्रवर्ग 4 छावनियाँ, जिनमें जनसंख्या दो हजार पाँच सौ से अधिक नहीं है। (2) उपधारा (1) के प्रयोजनो के लिए जनसंख्या की संगणना अन्तिम सरकारी जनगणना के अनुसार अथवा उस दषा में, जिसमें केन्द्रीय सरकार साधारण या विषेष जनगणना की जाएगी।