1. प्रत्येक ऐसी छावनी में, जिसमें घरेलू उपयोग के लिए पेय जल पर्याप्त प्रदाय विद्यमान नहीं है, बोर्ड ऐसे प्रदाय की व्यवस्था करेगा या ऐसे प्रदान करने के लिए इन्तजाम करेगा।
2. बोर्ड, जहां तक साध्य हो, इस बात का यथेष्ट उपबन्ध करेगा कि ऐसा प्रदाय पूरे वर्ष भर बराबर होता रहे तथा वह जल सब समयों पर मानव उपभोग के लिए उपयुक्त बना रहे।
3. प्रत्येक बोर्ड का यह कर्तव्य होगा कि वह छावनी के परिक्षेत्र में जल संचयन की वैज्ञानिक प्रणाली को व्यवहार में लाये और उसका प्रचार करे। जिसके अंतर्गत उपयोग के लिए वर्षा जल का संचयन भी है और भूमिगत जल के पुनः उपयोग के लिए व्यवस्था करे जिसके अंतर्गत भूमिगत जल स्त्रोत भी हैं और नदियों, झरनों स्त्रोतों और जल के अन्य प्राकृृतिक स्त्रोतों को संरक्षित करे।

बोर्ड द्वारा सर्वेक्षण कियाजाना और प्रस्ताव तैयार करना.-

बोर्ड, जब अपेक्षित हो-
छावनी में जल प्रदाय के विद्यमान उपभोग और मांग तथा छावनी में उपलब्ध तथा संभाव्यः उपलब्ध जल स्त्रोतों का सर्वेक्षण कर सकेगा;
छावनी की भावनी जल प्रदाय संबंधी आवश्यकताओं का प्राक्कलन तैयार करा सकेगा;
मल संग्रह की विद्यमान मात्रा का सर्वेक्षण कर सकेगा; और छावनी की विद्यमान या भावी जल प्रदाय संबंधी आवश्यकताओं के बारे में प्रस्ताव तैयार कर सकेगा; और छावनी में विद्यमान या भावी मल संग्रह संबंधी आवश्यकताओं के बारे में प्रस्ताव तैयार कर सकेगा जिसके अंतर्गत उस रीति की बाबत् जिससे और उस स्थान या उन स्थानों की बाबत् प्रस्ताव भी है जहां मल ले जाया जाएगा और उसका संग्रह किया जाएगा।
यदि बोर्ड की यह राय है कि बोर्ड में तत्समय निहित संकर्म या कोई अन्य संपत्ति इस अधिनियम के अधीन पर्याप्त जल प्रदाय या मल के दक्ष संग्रह के प्रयोजनों के लिए अपर्याप्त है तो वह प्रधान निदेशक के अनुमोदन से छावनी के भीतर या उससे बाहर अतिरिक्त संकर्मों के सन्निर्माण और ऐसे संकर्मों के लिए अतिरिक्त संपत्ति के अर्जन के लिए कदम उठा सकेगी।

लोक जल प्रदाय के स्त्रोतों पर नियंत्रण.-
बोर्ड, जल प्रदाय के ऐसे स्त्रोत से भिन्न जो सैनिक अभियन्ता सेवाओं या लोक निर्माण के नियंत्रण के अधीन है चाहे छावनी की सीमा में या उसके बाहर ऐसे किसी झील, सरिता, चष्मे, कुएं, तालाब, जलाषय या अन्य स्त्रोत की बाबत् जिससे लोक साधारण के उपयोग के लिए जल छावनी में उपलब्ध है या उपलभ्य किया जा सकता है, यह घोषणा केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से लोक सूचना द्वारा कर सकेगा कि वह लोक जल प्रदाय का स्त्रोत है।
प्रत्येक ऐसा स्त्रोत बोर्ड के नियन्त्रण के अधीन रहेगा और बोर्ड का यह दायित्व होगा कि वह ऐसे स्त्रोतों को परिरक्षित और अनुरक्षित रखे।

जल प्रदाय.-
इस संबंध में बोर्ड द्वारा बनाए गए मार्गदर्षक सिद्धांतों के अधीन रहते हुए मुख्य कार्यपालक अधिकारी किसी भवन या भूमि के स्वामी, पट्टेदार या अधिभोगी को अनुज्ञा दे सकेगा कि वह घरेलू उपयोग के लिए जल अभिप्राप्त करने के प्रयोजन से ऐसे आकार और किस्म के योजक पाइपों के जरिए, जैसे वे विहित करे, उस भवन या भूमि का कनैक्षन लोक जल प्रदाय के स्त्रोत से कर ले।
ऐसे प्रत्येक भवन का अधिभोगी, जिसका ऐसे कनेक्शन जल प्रदाय से किया गया है, इस बात का हकदार होगा कि जल कर के, यदि कोई हो, बदले इतनी मात्रा में जल घरेलू उपयोग के लिए जितना मुख्य कार्यपालक अधिकारी अवधारित करे।
उस मात्रा से, जिस तक उपधारा (2) के अधीन ऐसा प्रदाय परिसीमित है, आधिक्य में प्रदाय किए गए सब जल के लिए तथा ऐसी छावनी में, जिसमें जल कर अधिरोपित नहीं किया गया है, इस धारा के अधीन प्रदान किए गए सब जल के अदायगी ऐसे दर से की जाएगी जैसी बोर्ड उसकी वित्तीय सामथ्र्यता को ध्यान में रखते हुए नियत करे।

घरेलू उपयोग के लिए जल प्रदाय के अंतर्गत ऐसा कोई जल प्रदाय नहीं समझा जाएगा जो:-
ऐसे पशुओं के लिए या यानों के धोने के लिए, जो पषु या यान विक्रय या भाड़े के लिए रखे जात हैं,
किसी व्यापार, विनिर्माण या कारोबार के लिए है,
फव्वारों, तैरने के हौजों या किसी सजावटी या यांत्रिक प्रयोजन के लिए है,
बागों के लिए है या सिंचाई के प्रयोजनों के लिए है,
सड़क या रास्ते बनाने या उन पर पानी छिड़कने के लिए है, अथवा
निर्माण के प्रयोजन के लिए है।